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mahabharat 3.286.18-19: युद्ध में श्रेष्ठ वानर योद्धाओं द्वारा प्रहस्त और महाधनुर्धर धूम्राक्ष का सेना सहित मारे जाने का वृत्तांत उनके मुख से सुनकर रावण बहुत देर तक दुःख से आहें भरता रहा। फिर वह अपने महान सिंहासन से उछलकर बोला - 'अब कुम्भकर्ण के लिए अपना पराक्रम दिखाने का समय आ गया है।'॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 3.286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.286.18-19 
श्रुत्वा तु रावणस्तेभ्य: प्रहस्तं निहतं युधि।
धूम्राक्षं च महेष्वासं ससैन्यं वानरर्षभै:॥ १८॥
सुदीर्घमिव नि:श्वस्य समुत्पत्य वरासनात्।
उवाच कुम्भकर्णस्य कर्मकालोऽयमागत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में श्रेष्ठ वानर योद्धाओं द्वारा प्रहस्त और महाधनुर्धर धूम्राक्ष का सेना सहित मारे जाने का वृत्तांत उनके मुख से सुनकर रावण बहुत देर तक दुःख से आहें भरता रहा। फिर वह अपने महान सिंहासन से उछलकर बोला - 'अब कुम्भकर्ण के लिए अपना पराक्रम दिखाने का समय आ गया है।'॥18-19॥
 
Hearing from his mouth the story of the killing of Prahasta and the great archer Dhoomraaksha along with his army by the best monkey warriors in the war, Ravana kept sighing in sorrow for a long time. Then he jumped up from his great throne and said - 'Now the time has come for Kumbhakarna to show his prowess'.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)