श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 286: प्रहस्त और धूम्राक्षके वधसे दु:खी हुए रावणका कुम्भकर्णको जगाना और उसे युद्धमें भेजना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.286.11 
तं स रक्षोमहामात्रमापतन्तं सपत्नजित्।
प्रतिजग्राह हनुमांस्तरसा पवनात्मज:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब पवनपुत्र और शत्रुओं को जीतने वाले हनुमान्‌जी ने अपनी ओर आते हुए उस विशाल राक्षस को बड़े बल से पकड़ लिया॥11॥
 
Then Hanuman, the son of the wind and the conqueror of all enemies, caught hold of the huge demon coming towards him with great force. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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