श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 285: श्रीराम और रावणकी सेनाओंका द्वन्द्वयुद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.285.14 
विभीषण: प्रहस्तं च प्रहस्तश्च विभीषणम्।
खगपत्रै: शरैस्तीक्ष्णैरभ्यवर्षद् गतव्यथ:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इधर विभीषण ने प्रहस्त पर और प्रहस्त ने विभीषण पर तीखे पंखयुक्त बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। दोनों में से किसी को भी पीड़ा नहीं हुई ॥14॥
 
Here Vibhishana started showering sharp feathered arrows on Prahastha and Prahastha on Vibhishana. Neither of them felt any pain. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)