vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 285: श्रीराम और रावणकी सेनाओंका द्वन्द्वयुद्ध
»
श्लोक 14
श्लोक
3.285.14
विभीषण: प्रहस्तं च प्रहस्तश्च विभीषणम्।
खगपत्रै: शरैस्तीक्ष्णैरभ्यवर्षद् गतव्यथ:॥ १४॥
अनुवाद
इधर विभीषण ने प्रहस्त पर और प्रहस्त ने विभीषण पर तीखे पंखयुक्त बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। दोनों में से किसी को भी पीड़ा नहीं हुई ॥14॥
Here Vibhishana started showering sharp feathered arrows on Prahastha and Prahastha on Vibhishana. Neither of them felt any pain. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×