श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 285: श्रीराम और रावणकी सेनाओंका द्वन्द्वयुद्ध  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.285.12-13 
रावणो राममानर्छच्छक्तिशूलासिवृष्टिभि:।
निशितैरायसैस्तीक्ष्णै रावणं चापि राघव:॥ १२॥
तथैवेन्द्रजितं यत्तं लक्ष्मणो मर्मभेदिभि:।
इन्द्रजिच्चापि सौमित्रिं बिभेद बहुभि: शरै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
रावण ने शक्ति, शूल और तलवारों की वर्षा करके श्री रामचंद्रजी को बहुत कष्ट दिया और श्री रघुनाथजी ने भी लोहे के बने हुए तीखे बाणों से रावण को बहुत पीड़ा दी। इसी प्रकार लक्ष्मण ने युद्ध के लिए तत्पर हुए इंद्रजित को भेदी बाणों से घायल कर दिया और इंद्रजित ने सुमित्रानंदन लक्ष्मण को अनेक बाणों से बींध डाला। 12-13॥
 
Ravana gave a lot of pain to Shri Ramchandraji by showering power, prongs and swords and Shri Raghunathji also tormented Ravana a lot with sharp arrows made of iron. Similarly, Lakshmana wounded Indrajit, who was ready for war, with piercing arrows and Indrajit pierced Sumitranandan Lakshmana with many arrows. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)