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mahabharat 3.284.5: वे खाइयाँ भी बन्दूकें, अलाट (बनाठी), बाण, तोमर, तलवारें, कुल्हाड़ी, मोम के हथौड़े और तोपें आदि शस्त्रों के संग्रह के कारण अगम्य थीं।5॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.284.5 
मुसलालातनाराचतोमरासिपरश्वधै:।
अन्विताश्च शतघ्नीभि: समधूच्छिष्टमुद्‍गरा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वे खाइयाँ भी बन्दूकें, अलाट (बनाठी), बाण, तोमर, तलवारें, कुल्हाड़ी, मोम के हथौड़े और तोपें आदि शस्त्रों के संग्रह के कारण अगम्य थीं।5॥
 
Those trenches were also impassable because of the collection of weapons like muskets, alat (banathi), arrows, tomars, swords, axes, wax hammers and cannons etc. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)