Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.284.4: 'मजबूत द्वार लगाए गए थे और बमबारी करने वाले यंत्र अपने-अपने स्थान पर रखे गए थे। इनके अतिरिक्त, वहाँ बहुत-से सींग और गोले जमा किए गए थे। इन सब कारणों से इन खाइयों को पार करना बहुत कठिन था। यद्यपि ये खाइयाँ विषैले सर्पों, सैनिकों, शल्य द्रव (लाख) और धूल के समूहों से सुरक्षित थीं, फिर भी वे दुर्गम थीं।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.284.4 
कपाटयन्त्रदुर्धर्षा बभूवु: सहुडोपला:।
साशीविषघटायोधा: ससर्जरसपांसव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'मजबूत द्वार लगाए गए थे और बमबारी करने वाले यंत्र अपने-अपने स्थान पर रखे गए थे। इनके अतिरिक्त, वहाँ बहुत-से सींग और गोले जमा किए गए थे। इन सब कारणों से इन खाइयों को पार करना बहुत कठिन था। यद्यपि ये खाइयाँ विषैले सर्पों, सैनिकों, शल्य द्रव (लाख) और धूल के समूहों से सुरक्षित थीं, फिर भी वे दुर्गम थीं।॥4॥
 
‘Strong doors were installed and the bombarding machines were placed in their respective places. Apart from these, many horns and shells were stored there. Due to all these reasons, it was very difficult to cross these trenches. Even though these trenches were protected by groups of poisonous snakes, soldiers, surgeon's liquid (lacquer) and dust, they were inaccessible.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)