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mahabharat 3.284.34: वह चारदीवारी की शोभा बढ़ाते हुए वनवासी वानरों पर अस्त्र-शस्त्र बरसाकर उन्हें भगाने लगा और अपना महान पराक्रम दिखाने लगा ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.284.34 
शस्त्रवर्षाणि वर्षन्तो द्रावयित्वा वनौकस:।
प्राकारं शोभयन्तस्ते परं विक्रममास्थिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह चारदीवारी की शोभा बढ़ाते हुए वनवासी वानरों पर अस्त्र-शस्त्र बरसाकर उन्हें भगाने लगा और अपना महान पराक्रम दिखाने लगा ॥34॥
 
Enhancing the beauty of the boundary walls, he began to chase away the forest-dwelling monkeys by showering them with weapons and began to display his great valour. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)