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mahabharat 3.284.33: तत्पश्चात् राक्षसराज रावण की आज्ञा पाकर इच्छानुसार रूप धारण करने वाले राक्षस लाखों की संख्या में समूह बनाकर नगर से बाहर निकले। उन सबके रूप बड़े ही भयानक थे।   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.284.33 
ततस्तु राजवचनाद् राक्षसा: कामरूपिण:।
निर्ययुर्विकृताकारा: सहस्रशतसङ्घश:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राक्षसराज रावण की आज्ञा पाकर इच्छानुसार रूप धारण करने वाले राक्षस लाखों की संख्या में समूह बनाकर नगर से बाहर निकले। उन सबके रूप बड़े ही भयानक थे।
 
Thereafter, on receiving the orders of the demon king Ravana, the demons who could assume any form as per their wish came out of the city in groups of lakhs. All of them had very terrifying forms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)