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mahabharat 3.284.3: नगर के चारों ओर सात गहरी खाइयाँ थीं, जिनमें भरपूर पानी भरा रहता था और उनमें मछलियाँ, मगरमच्छ आदि जलीय जीव रहते थे। इन खाइयों में चारों ओर खैर (लकड़ी) की खूँटियाँ गड़ी हुई थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.284.3 
अगाधतोया: परिखा मीननक्रसमाकुला:।
बभूवु: सप्त दुर्धर्षा: खादिरै: शङ्कुभिश्चिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नगर के चारों ओर सात गहरी खाइयाँ थीं, जिनमें भरपूर पानी भरा रहता था और उनमें मछलियाँ, मगरमच्छ आदि जलीय जीव रहते थे। इन खाइयों में चारों ओर खैर (लकड़ी) की खूँटियाँ गड़ी हुई थीं।
 
There were seven deep ditches around the city, which were filled with a lot of water and aquatic animals like fish, crocodiles etc. lived in them. There were pegs of Khair (wooden wood) buried all around in these ditches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)