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mahabharat 3.284.28-29: हे राजन! लंका की सीमाएँ सब ओर से कपिलवर्ण के रंग की प्रतीत हो रही थीं, क्योंकि उनमें वानरों का निवास था, जिनका रंग धान के पुष्प के समान, आभा मौलसिरी के पुष्प के समान, प्रभाव प्रातःकालीन सूर्य के समान और रंग श्वेत भांग के समान था। लंका में निवास करने वाले स्त्रियों और वृद्धों सहित सभी राक्षस आश्चर्यचकित होकर यह दृश्य देख रहे थे॥28-29॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  3.284.28-29 
शालिप्रसूनसदृशै: शिरीषकुसुमप्रभै:।
तरुणादित्यसदृशै: शणगौरैश्च वानरै:॥ २८॥
प्राकारं ददृशुस्ते तु समन्तात् कपिलीकृतम्।
राक्षसा विस्मिता राजन् सस्त्रीवृद्धा: समन्तत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! लंका की सीमाएँ सब ओर से कपिलवर्ण के रंग की प्रतीत हो रही थीं, क्योंकि उनमें वानरों का निवास था, जिनका रंग धान के पुष्प के समान, आभा मौलसिरी के पुष्प के समान, प्रभाव प्रातःकालीन सूर्य के समान और रंग श्वेत भांग के समान था। लंका में निवास करने वाले स्त्रियों और वृद्धों सहित सभी राक्षस आश्चर्यचकित होकर यह दृश्य देख रहे थे॥28-29॥
 
O King! The boundary walls of Lanka appeared to be of the Kapilvarna colour on all sides because they were inhabited by monkeys whose colour was like that of paddy flowers, their lustre was like that of maulsiri flowers, their influence was like that of the morning sun and their colour was like that of white hemp. All the demons residing in Lanka, including women and old people, were looking at this scene in amazement.॥28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)