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mahabharat 3.284.24: नगर का दक्षिणी द्वार प्रवेश करने में बहुत कठिन था, परन्तु लक्ष्मण ने विभीषण और जाम्बवान को आगे धकेलकर उसे भी कुचल दिया॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.284.24 
विभीषणर्क्षाधिपती पुरस्कृत्याथ लक्ष्मण:।
दक्षिणं नगरद्वारमवामृद्नाद् दुरासदम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
नगर का दक्षिणी द्वार प्रवेश करने में बहुत कठिन था, परन्तु लक्ष्मण ने विभीषण और जाम्बवान को आगे धकेलकर उसे भी कुचल दिया॥ 24॥
 
The southern gate of the city was very difficult to enter, but Lakshmana pushed Vibhishana and Jambavan ahead and crushed it as well.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)