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mahabharat 3.284.19: इस प्रकार अंगद अपने शरीर से चिपके हुए चारों राक्षसों को लेकर आकाश में कूद पड़े और महल की छत पर चढ़ गए।   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.284.19 
तांस्तथाङ्गेषु संसक्तानङ्गदो रजनीचरान्।
आदायैव खमुत्पत्य प्रासादतलमाविशत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अंगद अपने शरीर से चिपके हुए चारों राक्षसों को लेकर आकाश में कूद पड़े और महल की छत पर चढ़ गए।
 
Angada, thus carrying the four demons clinging to his body, jumped into the sky and climbed to the roof of the palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)