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mahabharat 3.284.18: तब चारों रक्षपाल अपने स्वामी का संकेत समझकर अपने स्थान से उठे और अंगद के शरीर के चारों अंगों को उसी प्रकार पकड़ने लगे, जैसे पक्षी सिंह को पकड़ते हैं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.284.18 
इङ्गितज्ञास्ततो भर्तुश्चत्वारो रजनीचरा:।
चतुर्ष्वङ्गेषु जगृहु: शार्दूलमिव पक्षिण:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब चारों रक्षपाल अपने स्वामी का संकेत समझकर अपने स्थान से उठे और अंगद के शरीर के चारों अंगों को उसी प्रकार पकड़ने लगे, जैसे पक्षी सिंह को पकड़ते हैं॥18॥
 
Then the four night-bearers, understanding the signal of their master, got up from their places and began to catch the four body parts of Angad, just as birds catch a lion.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)