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mahabharat 3.284.17: राजा रावण श्री राम के दूत के मुख से ऐसे कठोर शब्द सुनकर सहन नहीं कर सका और क्रोध से मूर्छित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 3.284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 284: अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाकर लौटना तथा राक्षसों और वानरोंका घोर संग्राम  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.284.17 
इति तस्य ब्रुवाणस्य दूतस्य परुषं वच:।
श्रुत्वा न ममृषे राजा रावण: क्रोधमूर्च्छित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा रावण श्री राम के दूत के मुख से ऐसे कठोर शब्द सुनकर सहन नहीं कर सका और क्रोध से मूर्छित हो गया।
 
King Ravana could not bear to hear such harsh words from the mouth of Sri Rama's messenger. He fainted in anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)