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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.283.9 
एते चान्ये च बहवो हरियूथपयूथपा:।
असंख्येया महाराज समीयू रामकारणात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ये तथा अन्य अनेक वानर सेनापति, जिनकी संख्या असंख्य थी, श्री रामचन्द्रजी के कार्य के लिए वहाँ एकत्र हुए थे।
 
Maharaj! These and many other leaders of the monkey leaders, whose number was innumerable, gathered there for the work of Shri Ramchandraji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)