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mahabharat 3.283.8: जाम्बवान्, जिनके मुख (ललाट) पर तिलक लगा हुआ था और जो महाबली योद्धा थे, वे वहाँ दस करोड़ काले भालुओं की सेना के साथ दिखाई दिए।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.283.8 
कृष्णानां मुखपुण्ड्राणामृक्षाणां भीमकर्मणाम्।
कोटीशतसहस्रेण जाम्बवान् प्रत्यदृश्यत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जाम्बवान्, जिनके मुख (ललाट) पर तिलक लगा हुआ था और जो महाबली योद्धा थे, वे वहाँ दस करोड़ काले भालुओं की सेना के साथ दिखाई दिए।
 
Jambavan, whose face (forehead) was adorned with the mark of a Tilak and who was a fierce warrior, was seen there with an army of ten crore (10 trillion) bears of black colour. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)