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mahabharat 3.283.53: जब वे दोनों राक्षस अपने राक्षसी रूप में प्रकट हुए, तो भगवान राम ने उन्हें अपनी सेना दिखाई और फिर उन्हें मुक्त कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.283.53 
प्रतिपन्नौ यदा रूपं राक्षसं तौ निशाचरौ।
दर्शयित्वा तत: सैन्यं राम: पश्चादवासृजत्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जब वे दोनों राक्षस अपने राक्षसी रूप में प्रकट हुए, तो भगवान राम ने उन्हें अपनी सेना दिखाई और फिर उन्हें मुक्त कर दिया।
 
When those two demons appeared in their devilish forms, Lord Rama showed them his army and then released them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)