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mahabharat 3.283.51: तत्पश्चात् लंका की सीमा पर पहुँचकर उन्होंने वहाँ के बहुत से बड़े-बड़े उद्यानों को वानरों से नष्ट करवा दिया ॥51॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.283.51 
ततो गत्वा समासाद्य लङ्कोद्यानान्यनेकश:।
भेदयामास कपिभिर्महान्ति च बहूनि च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् लंका की सीमा पर पहुँचकर उन्होंने वहाँ के बहुत से बड़े-बड़े उद्यानों को वानरों से नष्ट करवा दिया ॥51॥
 
Thereafter, on reaching the border of Lanka, he got many of the large gardens there destroyed by the monkeys. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)