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mahabharat 3.283.5: गंधमादन पर्वत पर रहने वाले गंधमादन नामक प्रसिद्ध वानर अपने साथ दस खरब वानरों की सेना लेकर आए थे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.283.5 
गन्धमादनवासी तु प्रथितो गन्धमादन:।
कोटीशतसहस्राणि हरीणां समकर्षत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
गंधमादन पर्वत पर रहने वाले गंधमादन नामक प्रसिद्ध वानर अपने साथ दस खरब वानरों की सेना लेकर आए थे ॥5॥
 
The renowned monkey named Gandhamadana who lived on the Gandhamadana mountain brought along with him an army of ten trillion monkeys. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)