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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.283.49 
सर्वराक्षसराज्ये चाप्यभ्यषिञ्चद् विभीषणम्।
चक्रे च मन्त्रसचिवं सुहृदं लक्ष्मणस्य च॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने उसे सभी राक्षसों के राजा के रूप में भी अभिषिक्त किया और उसे लक्ष्मण का मित्र और सलाहकार बनाया।
 
He also anointed him as the king of all the demons and made him Lakshmana's friend and his advisor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)