Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.283.48: तथापि, उसके सच्चे प्रयास, सदाचार और मुख, नेत्र आदि से प्रकट हुए भावों का भली-भाँति मूल्यांकन करके, जब भगवान् रामजी पूर्णतः संतुष्ट हो गए, तब उन्होंने विभीषण का बहुत आदर किया ॥48॥ | mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथापि, उसके सच्चे प्रयास, सदाचार और मुख, नेत्र आदि से प्रकट हुए भावों का भली-भाँति मूल्यांकन करके, जब भगवान् रामजी पूर्णतः संतुष्ट हो गए, तब उन्होंने विभीषण का बहुत आदर किया ॥48॥
However, after carefully evaluating his sincere efforts, good conduct and the sentiments expressed by his face, eyes etc., Lord Rama respected Vibhishan very much when he was fully satisfied. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥