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mahabharat 3.283.45: आज भी वह संसार में 'नल सेतु' के नाम से प्रसिद्ध है। श्रीराम की आज्ञा मानकर समुद्र ने उस पर्वतरूपी सेतु को अपने ऊपर धारण कर लिया। 45.   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.283.45 
नलसेतुरिति ख्यातो योऽद्यापि प्रथितो भुवि।
रामस्याज्ञां पुरस्कृत्य निर्यातो गिरिसंनिभ:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
आज भी वह संसार में 'नल सेतु' के नाम से प्रसिद्ध है। श्रीराम की आज्ञा मानकर समुद्र ने उस पर्वतरूपी सेतु को अपने ऊपर धारण कर लिया। 45.
 
Even today it is famous in the world by the name of 'Nal Setu'. Obeying the command of Shri Ram, the ocean held that mountain-like bridge on itself. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)