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mahabharat 3.283.43: यह कहकर समुद्र अंतर्धान हो गया। तब श्रीराम उठे और नल से कहा - 'तुम समुद्र पर पुल बनाओ। मैं जानता हूँ कि तुममें यह कार्य करने की शक्ति है।' 43.   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.283.43 
इत्युक्त्वान्तर्हिते तस्मिन् रामो नलमुवाच ह।
कुरु सेतुं समुद्रे त्वं शक्तो ह्यसि मतो मम॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर समुद्र अंतर्धान हो गया। तब श्रीराम उठे और नल से कहा - 'तुम समुद्र पर पुल बनाओ। मैं जानता हूँ कि तुममें यह कार्य करने की शक्ति है।' 43.
 
Saying this, the ocean disappeared. Then Shri Ram got up and said to Nala - 'You build a bridge over the ocean. I know that you have the power to do this work'. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)