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mahabharat 3.283.39: श्री राम! मैं आपका सामना नहीं करना चाहता, न ही आपके मार्ग में बाधा डालना चाहता हूँ। मेरी बात सुनो और मेरी बात सुनकर जो कर्तव्य करना हो, करो॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.283.39 
नेच्छामि प्रतिघातं ते नास्मि विघ्नकरस्तव।
शृणु चेदं वचो राम श्रुत्वा कर्तव्यमाचर॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! मैं आपका सामना नहीं करना चाहता, न ही आपके मार्ग में बाधा डालना चाहता हूँ। मेरी बात सुनो और मेरी बात सुनकर जो कर्तव्य करना हो, करो॥ 39॥
 
Shri Ram! I do not wish to face you, nor do I wish to create obstacles in your path. Listen to me and do whatever duty you have to do after listening to me.॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)