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mahabharat 3.283.38: श्री रामजी के ये वचन सुनकर वरुणालय समुद्र व्याकुल हो गया और उठकर हाथ जोड़कर बोला-॥38॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.283.38 
इत्येवं ब्रुवत: श्रुत्वा रामस्य वरुणालय:।
उवाच व्यथितो वाक्यमिति बद्धाञ्जलि: स्थित:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के ये वचन सुनकर वरुणालय समुद्र व्याकुल हो गया और उठकर हाथ जोड़कर बोला-॥38॥
 
On hearing these words of Sri Rama, the ocean of Varunalaya became agitated and stood up and said with folded hands -॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)