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mahabharat 3.283.37: यदि इस प्रकार विनती करने पर भी तुम मुझे मार्ग न दोगे तो मैं दिव्यास्त्रों से अभिमंत्रित बाणों द्वारा तुम्हें सुखा डालूँगा ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.283.37 
यद्येवं याचतो मार्गं न प्रदास्यति मे भवान्।
शरैस्त्वां शोषयिष्यामि दिव्यास्त्रप्रतिमन्त्रितै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि इस प्रकार विनती करने पर भी तुम मुझे मार्ग न दोगे तो मैं दिव्यास्त्रों से अभिमंत्रित बाणों द्वारा तुम्हें सुखा डालूँगा ॥37॥
 
"If you don't give me the way despite pleading like this, I will dry you up with arrows consecrated with divine weapons." ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)