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mahabharat 3.283.36: नाद-नदीश्वर! मैं अपनी सेना के लिए आपके द्वारा दिया गया मार्ग चाहता हूँ, जिससे मैं जाकर पुलस्त्यकुलांगार दशमुख रावण का वध कर सकूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.283.36 
मार्गमिच्छामि सैन्यस्य दत्तं नदनदीपते।
येन गत्वा दशग्रीवं हन्यां पौलस्त्यपांसनम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
नाद-नदीश्वर! मैं अपनी सेना के लिए आपके द्वारा दिया गया मार्ग चाहता हूँ, जिससे मैं जाकर पुलस्त्यकुलांगार दशमुख रावण का वध कर सकूँ।
 
Nada-Nadeeshvara! I want the path given by you for my army, so that I can go and kill Pulastyakulaangaar Dashamukh Ravana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)