Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.283.35: हे पुरुषश्रेष्ठ! आप मुझे बताइए, मैं यहाँ आपकी किस प्रकार सहायता कर सकता हूँ? सगर के पुत्रों द्वारा पोषित होने के कारण मैं भी इक्ष्वाकु वंश का हूँ और आपका भाई हूँ।' यह सुनकर श्री रामचंद्रजी ने उनसे कहा-॥35॥ | mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रूहि किं ते करोम्यत्र साहाय्यं पुरुषर्षभ।
ऐक्ष्वाको ह्यस्मि ते ज्ञातिरिति रामस्तमब्रवीत्॥ ३५॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आप मुझे बताइए, मैं यहाँ आपकी किस प्रकार सहायता कर सकता हूँ? सगर के पुत्रों द्वारा पोषित होने के कारण मैं भी इक्ष्वाकु वंश का हूँ और आपका भाई हूँ।' यह सुनकर श्री रामचंद्रजी ने उनसे कहा-॥35॥
O best of men! Tell me, how can I help you here? Being nourished by the sons of Sagara, I too belong to the Ikshwaku lineage and am your brother.' Hearing this, Shri Ramchandraji said to him -॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥