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mahabharat 3.283.34: वे सैकड़ों रत्नों से घिरे हुए थे। उन्होंने श्री राम को 'कौसल्यानंदन' कहकर संबोधित किया और मधुर वाणी में कहा-॥34॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.283.34 
कौसल्यामातरित्येवमाभाष्य मधुरं वच:।
इदमित्याह रत्नानामाकरै: शतशो वृत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वे सैकड़ों रत्नों से घिरे हुए थे। उन्होंने श्री राम को 'कौसल्यानंदन' कहकर संबोधित किया और मधुर वाणी में कहा-॥34॥
 
He was surrounded by hundreds of gems. He addressed Shri Ram as 'Kausalyanandan' and said in a sweet voice -॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)