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mahabharat 3.283.33: तब नदियों और सरिताओं के स्वामी श्रीमन समुद्रदेव जलचरों के साथ प्रकट होकर श्री रामजी को स्वप्न में दिखाई दिए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.283.33 
सागरस्तु तत: स्वप्ने दर्शयामास राघवम्।
देवो नदनदीभर्ता श्रीमान् यादोगणैर्वृत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब नदियों और सरिताओं के स्वामी श्रीमन समुद्रदेव जलचरों के साथ प्रकट होकर श्री रामजी को स्वप्न में दिखाई दिए ॥33॥
 
Then the lord of the rivers and streams, Shriman Samudradev, appeared along with the aquatic animals and appeared before Shri Ram in his dream. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)