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mahabharat 3.283.31: यदि वह प्रकट होकर मुझे मार्ग न दिखाए, तो मैं उसे उन महान दिव्य अस्त्रों से भस्म कर दूँगा, जो अग्नि और वायु से भी अधिक तेजस्वी हैं और जिनसे कभी चूकते नहीं।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.283.31 
न चेद् दर्शयिता मार्गं धक्ष्याम्येनमहं तत:।
महास्त्रैरप्रतिहतैरत्यग्निपवनोज्ज्वलै:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यदि वह प्रकट होकर मुझे मार्ग न दिखाए, तो मैं उसे उन महान दिव्य अस्त्रों से भस्म कर दूँगा, जो अग्नि और वायु से भी अधिक तेजस्वी हैं और जिनसे कभी चूकते नहीं।॥31॥
 
If he does not reveal himself and show me the way, then I will burn him to ashes with the great divine weapons which are more radiant than even fire and wind and which will never miss.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)