Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.283.30: मैं किसी भी प्रकार से इस सागर की पूजा आरम्भ करूँगा। इसके तट पर बिना कुछ खाए-पिए बैठूँगा। यह अवश्य ही मेरे सामने प्रकट होकर मुझे मार्ग दिखाएगा॥30॥ | mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं किसी भी प्रकार से इस सागर की पूजा आरम्भ करूँगा। इसके तट पर बिना कुछ खाए-पिए बैठूँगा। यह अवश्य ही मेरे सामने प्रकट होकर मुझे मार्ग दिखाएगा॥30॥
‘I will start worshipping this ocean by any means. I will sit on its shores without eating or drinking anything. It will surely appear before me and show me the way.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥