Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.283.29: 'अगर हम नाव आदि से यात्रा करेंगे, तो हमारी सेना बिखरकर दूर तक फैल जाएगी। ऐसे में, शत्रु अवसर पाकर उसे नष्ट कर सकता है। इसलिए डोंगी या नाव आदि में बैठकर नदी पार करने का विचार मुझे उचित नहीं लगता।'   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.283.29 
विस्तीर्णं चैव न: सैन्यं हन्याच्छिद्रेण वै पर:।
प्लवोडुपप्रतारश्च नैवात्र मम रोचते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'अगर हम नाव आदि से यात्रा करेंगे, तो हमारी सेना बिखरकर दूर तक फैल जाएगी। ऐसे में, शत्रु अवसर पाकर उसे नष्ट कर सकता है। इसलिए डोंगी या नाव आदि में बैठकर नदी पार करने का विचार मुझे उचित नहीं लगता।'
 
‘If we travel by boat etc., our army will be scattered and spread out over a long distance. In that case, the enemy can destroy it if he gets the opportunity. That is why the idea of ​​crossing the river by sitting in a canoe or boat etc. does not seem right to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)