Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.283.27: हे प्रभु! सभी वानरों में सौ योजन विशाल समुद्र को पार करने की शक्ति नहीं होती; अतः तुम्हारा यह निर्णय सर्वमान्य सिद्धान्त के रूप में स्वीकार्य नहीं है। 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.283.27 
शतयोजनविस्तारं न शक्ता: सर्ववानरा:।
क्रान्तुं तोयनिधिं वीरा नैषा वो नैष्ठिकी मति:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! सभी वानरों में सौ योजन विशाल समुद्र को पार करने की शक्ति नहीं होती; अतः तुम्हारा यह निर्णय सर्वमान्य सिद्धान्त के रूप में स्वीकार्य नहीं है। 27॥
 
Vero! Not all monkeys have the strength to cross a hundred yojana wide ocean; Therefore, this decision of yours is not acceptable as a universally accepted principle. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)