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mahabharat 3.283.24: ‘मित्रो! हमारी सेना बहुत बड़ी है और हमारे सामने जो समुद्र है, उसे पार करना अत्यंत कठिन है। ऐसी स्थिति में समुद्र पार करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है, यह तुम लोग क्या समझते हो?’॥24॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.283.24 
उपाय: को नु भवतां मत: सागरलङ्घने।
इयं हि महती सेना सागरश्चातिदुस्तर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘मित्रो! हमारी सेना बहुत बड़ी है और हमारे सामने जो समुद्र है, उसे पार करना अत्यंत कठिन है। ऐसी स्थिति में समुद्र पार करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है, यह तुम लोग क्या समझते हो?’॥24॥
 
‘Friends! Our army is very large and the ocean in front of us is extremely difficult to cross. In such a situation, what do you think is the best way to cross the ocean?’॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)