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mahabharat 3.283.22: असंख्य ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित वह विशाल सेना दूसरे सागर के समान प्रतीत हो रही थी। समुद्र तट के निकट वन में पहुँचकर उसने अपना पड़ाव डाला।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.283.22 
द्वितीयसागरनिभं तद् बलं बहुलध्वजम्।
वेलावनं समासाद्य निवासमकरोत् तदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
असंख्य ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित वह विशाल सेना दूसरे सागर के समान प्रतीत हो रही थी। समुद्र तट के निकट वन में पहुँचकर उसने अपना पड़ाव डाला।
 
That huge army decorated with innumerable flags and banners appeared like another ocean. Reaching the forest near the sea shore, he made his camp.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)