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mahabharat 3.283.20-21: विभिन्न शुभ एवं उत्कृष्ट पर्वत शिखरों पर, जहाँ फल-मूल, मधु और कंद प्रचुर मात्रा में थे तथा जहाँ जल सहज रूप से उपलब्ध था, डेरा डालकर वह वानरों की सेना बिना किसी बाधा के खारे समुद्र तक पहुँच गई।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.283.20-21 
विविधेषु प्रशस्तेषु बहुमूलफलेषु च।
प्रभूतमधुमूलेषु वारिमत्सु शिवेषु च॥ २०॥
निवसन्ती निराबाधा तथैव गिरिसानुषु।
उपायाद्धरिसेना सा क्षारोदमथ सागरम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
विभिन्न शुभ एवं उत्कृष्ट पर्वत शिखरों पर, जहाँ फल-मूल, मधु और कंद प्रचुर मात्रा में थे तथा जहाँ जल सहज रूप से उपलब्ध था, डेरा डालकर वह वानरों की सेना बिना किसी बाधा के खारे समुद्र तक पहुँच गई।
 
Camping on various auspicious and excellent mountain peaks where there was abundance of fruits and roots, honey and tubers and where water was readily available, that army of monkeys reached the salty sea without any hindrance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)