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mahabharat 3.283.19: वह विशाल वानर सेना नल, नील, अंगद, क्रथ, मैन्द और द्विविद से सुरक्षित होकर श्री रामचन्द्रजी का कार्य सिद्ध करने के लिए आगे बढ़ती रही।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.283.19 
नलनीलाङ्गदक्राथमैन्दद्विविदपालिता।
ययौ सुमहती सेना राघवस्यार्थसिद्धये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह विशाल वानर सेना नल, नील, अंगद, क्रथ, मैन्द और द्विविद से सुरक्षित होकर श्री रामचन्द्रजी का कार्य सिद्ध करने के लिए आगे बढ़ती रही।
 
That huge monkey army, protected by Nala, Neel, Angad, Kraath, Maind and Dwivid, kept moving forward to accomplish the task of Sri Ramachandraji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)