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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.283.16 
मुखमासीत् तु सैन्यस्य हनूमान् मारुतात्मज:।
जघनं पालयामास सौमित्रिरकुतोभय:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस सेना के अग्रभाग में वायुपुत्र हनुमान जी उपस्थित थे और पीछे की ओर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण जी, जो किसी से नहीं डरते थे, रक्षा कर रहे थे।
 
Hanuman, the son of Vayu, was present at the head of that army. Sumitra's son Lakshman, who was not afraid of anyone, was protecting its rear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)