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mahabharat 3.283.14-15: तदनन्तर, जब वे सभी महापुरुष वानर सब ओर से एकत्र हो गए, तब शुभ दिन, शुभ नक्षत्र और शुभ समय में भगवान् राम सुग्रीव के साथ युद्ध के लिए चल पड़े। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे उस सेना के साथ युद्ध-पंक्ति में लीन होकर समस्त लोकों का विनाश करने जा रहे हैं॥ 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.283.14-15 
ततस्तेषु हरीन्द्रेषु समावृत्तेषु सर्वश:।
तिथौ प्रशस्ते नक्षत्रे मुहूर्ते चाभिपूजिते॥ १४॥
तेन व्यूढेन सैन्येन लोकानुद्वर्तयन्निव।
प्रययौ राघव: श्रीमान् सुग्रीवसहितस्तदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, जब वे सभी महापुरुष वानर सब ओर से एकत्र हो गए, तब शुभ दिन, शुभ नक्षत्र और शुभ समय में भगवान् राम सुग्रीव के साथ युद्ध के लिए चल पड़े। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे उस सेना के साथ युद्ध-पंक्ति में लीन होकर समस्त लोकों का विनाश करने जा रहे हैं॥ 14-15॥
 
Thereafter, when all those great monkeys had gathered from all sides, Lord Rama along with Sugreeva set out for the war on an auspicious day, in a good constellation and at an auspicious time. At that time it seemed as if they were going to destroy all the worlds with that army in battle formation.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)