Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.283.12: वानर सैनिक सब ओर से इकट्ठे होकर उछलते, गिरते, उछलते और धूल उड़ाते हुए आ रहे थे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.283.12 
उत्पतन्त: पतन्तश्च प्लवमानाश्च वानरा:।
उद्‍धुन्वन्तोऽपरे रेणून् समाजग्मु: समन्तत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वानर सैनिक सब ओर से इकट्ठे होकर उछलते, गिरते, उछलते और धूल उड़ाते हुए आ रहे थे॥12॥
 
The monkey soldiers were gathering from all sides, jumping, falling, leaping and raising dust.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)