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mahabharat 3.283.1: मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तत्पश्चात सुग्रीव की आज्ञा से महाप्रतापी वानर योद्धा भगवान श्री राम के पास पहुँचने लगे, जो माल्यवान पर्वत पर लक्ष्मण आदि के साथ बैठे हुए थे॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.283.1 
मार्कण्डेय उवाच
ततस्तत्रैव रामस्य समासीनस्य तै: सह।
समाजग्मु: कपिश्रेष्ठा: सुग्रीववचनात् तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तत्पश्चात सुग्रीव की आज्ञा से महाप्रतापी वानर योद्धा भगवान श्री राम के पास पहुँचने लगे, जो माल्यवान पर्वत पर लक्ष्मण आदि के साथ बैठे हुए थे॥1॥
 
Markandeyaji says- Yudhishthir! Thereafter, as per the orders of Sugriva, the great monkey warriors started reaching Lord Shri Ram who was sitting with Lakshman etc. on Malyavan mountain. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)