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mahabharat 3.282.8: सुमित्रानंदन! मैं उस नीच वानर को इस पृथ्वी पर कृतघ्न समझता हूँ, क्योंकि वह मूर्ख इस आयु को प्राप्त होकर मुझे भूल गया है॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.282.8 
कृतघ्नं तमहं मन्ये वानरापसदं भुवि।
यो मामेवंगतो मूढो न जानीतेऽद्य लक्ष्मण॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! मैं उस नीच वानर को इस पृथ्वी पर कृतघ्न समझता हूँ, क्योंकि वह मूर्ख इस आयु को प्राप्त होकर मुझे भूल गया है॥8॥
 
Sumitra Nandan! I consider that lowly monkey to be ungrateful on this earth, because that fool has forgotten me after reaching this age. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)