Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.282.71: तदनन्तर मैंने जान-बूझकर राक्षसों के द्वारा अपने को बंदी बना लिया और लंकापुरी को जलाकर समुद्र के इस पार आ पहुँचा।’ यह सब समाचार सुनकर श्री रामचन्द्रजी ने प्रियवदि हनुमान् का बहुत आदर-सत्कार किया॥ 71॥ | mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर मैंने जान-बूझकर राक्षसों के द्वारा अपने को बंदी बना लिया और लंकापुरी को जलाकर समुद्र के इस पार आ पहुँचा।’ यह सब समाचार सुनकर श्री रामचन्द्रजी ने प्रियवदि हनुमान् का बहुत आदर-सत्कार किया॥ 71॥
Thereafter I deliberately got myself captured by the demons and after burning Lankapuri, I reached this side of the ocean.' On hearing all this news, Shri Ramchandraji honoured Priyavadi Hanuman very much.॥ 71॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि हनुमत्प्रत्यागमने द्वॺशीत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें हनुमान्जीके लंकासे लौटनेसे सम्बन्ध
रखनेवाला दो सौ बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८२॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७१ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥