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mahabharat 3.282.70-d1h: पुरुषसिंह! उस कथा का मुख्य विषय यह है कि जब आप महान पर्वत चित्रकूट पर निवास कर रहे थे, तब आपने एक कौवे पर सरकंडे का बाण चलाकर उस दुष्ट कौवे की एक आँख छीन ली थी। यह घटना उन्होंने केवल अपनी पहचान स्थापित करने के लिए प्रस्तुत की थी।   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 70-d1h
 
 
श्लोक  3.282.70-d1h 
क्षिप्तामिषीकां काकाय चित्रकूटे महागिरौ।
भवता पुरुषव्याघ्र प्रत्यभिज्ञानकारणात्॥ ७०॥
(एकाक्षिविकल: काक: सुदुष्टात्मा कृतश्च वै।)
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! उस कथा का मुख्य विषय यह है कि जब आप महान पर्वत चित्रकूट पर निवास कर रहे थे, तब आपने एक कौवे पर सरकंडे का बाण चलाकर उस दुष्ट कौवे की एक आँख छीन ली थी। यह घटना उन्होंने केवल अपनी पहचान स्थापित करने के लिए प्रस्तुत की थी।
 
Purushasingh! The main theme of that story is that while you were living on the great mountain Chitrakoot, you had shot an arrow made of a reed at a crow and deprived that evil-spirited crow of one eye. He had presented this incident only to establish his identity. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)