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mahabharat 3.282.60: लंका पहुंचकर मैंने रावण के हरम में सती सीता को देखा, जो अपने पति के दर्शन की इच्छा से लगातार उपवास और तपस्या कर रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.282.60 
तत्र सीता मया दृष्टा रावणान्त:पुरे सती।
उपवासतप:शीला भर्तृदर्शनलालसा॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
लंका पहुंचकर मैंने रावण के हरम में सती सीता को देखा, जो अपने पति के दर्शन की इच्छा से लगातार उपवास और तपस्या कर रही थीं।
 
After reaching Lanka, I saw Sati Sita in Ravana's harem, who was continuously fasting and performing penance in the desire to see her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)