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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  3.282.51-52h 
तस्यैवं वदतोऽस्माभिर्हतो भ्राता निवेदित:॥ ५१॥
व्यसनं भवतश्चेदं संक्षेपाद् वै निवेदितम्।
 
 
अनुवाद
'जब सम्पाती ऐसी बातें कर रहे थे, तब हमने उन्हें जटायु के मारे जाने की बात बताई थी। साथ ही, हमने आपको आपके ऊपर आई विपत्ति के बारे में भी संक्षेप में बताया था।
 
‘When Sampati was talking like this, we told him that Jatayu was killed. Along with that we also briefly informed you about the calamity that has befallen you. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)