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mahabharat 3.282.48-49: वह पक्षी हमें खाने का उपाय सोचने लगा। फिर वह हमारे पास आया और बोला - 'अरे! मेरे भाई जटायु की बात कौन कर रहा था? मैं उसका बड़ा भाई, पक्षीराज सम्पाती हूँ। हम दोनों एक-दूसरे से होड़ लगाते हुए सूर्य तक पहुँचने के लिए आकाश में उड़ रहे थे।' 48-49.   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  3.282.48-49 
सोऽस्मानतर्कयद् भोक्तुमथाभ्येत्य वचोऽब्रवीत्।
भो: क एष मम भ्रातुर्जटायो: कुरुते कथाम्॥ ४८॥
सम्पातिर्नाम तस्याहं ज्येष्ठो भ्राता खगाधिप:।
अन्योन्यस्पर्धयारूढावावामादित्यसत्पदम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वह पक्षी हमें खाने का उपाय सोचने लगा। फिर वह हमारे पास आया और बोला - 'अरे! मेरे भाई जटायु की बात कौन कर रहा था? मैं उसका बड़ा भाई, पक्षीराज सम्पाती हूँ। हम दोनों एक-दूसरे से होड़ लगाते हुए सूर्य तक पहुँचने के लिए आकाश में उड़ रहे थे।' 48-49.
 
‘That bird started thinking of a way to eat us. Then he came to us and said – ‘Hey! Who was talking about my brother Jatayu? I am his elder brother, the bird king Sampati. Both of us were competing with each other and flying in the sky to reach the sun. 48-49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)