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mahabharat 3.282.36: मैं अपनी पत्नी को खोकर और तपस्वी होकर विदेहनन्दिनी सीता को बचाए बिना और युद्धस्थल में शत्रुओं का वध किए बिना जीवित नहीं रह सकता।॥36॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.282.36 
अमोक्षयित्वा वैदेहीमहत्वा च रणे रिपून्।
हृतदारोऽवधूतश्च नाहं जीवितुमुत्सहे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैं अपनी पत्नी को खोकर और तपस्वी होकर विदेहनन्दिनी सीता को बचाए बिना और युद्धस्थल में शत्रुओं का वध किए बिना जीवित नहीं रह सकता।॥36॥
 
I cannot continue to live after losing my wife and becoming an ascetic without rescuing Videhanandini Sita and without killing the enemies in the battle-field.'॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)