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mahabharat 3.282.35: क्या मैं युद्ध में शत्रुओं का वध करके जनकनन्दिनी सीता को साथ लेकर पुनः अयोध्या में राज्य करूँ?   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.282.35 
अपि राज्यमयोध्यायां कारयिष्याम्यहं पुन:।
निहत्य समरे शत्रूनाहृत्य जनकात्मजाम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
क्या मैं युद्ध में शत्रुओं का वध करके जनकनन्दिनी सीता को साथ लेकर पुनः अयोध्या में राज्य करूँ?
 
Shall I kill the enemies in the war and take along with me Janakanandini Sita and rule in Ayodhya again?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)